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डी.सी. मोटर की दक्षता कैसे ज्ञात करें (how to find efficiency of DC motor in hindi)

नमस्कार दोस्तों इस लेख में हम जानेंगे कि दिष्ट धारा मोटर की दक्षता (Efficiency of DC motor) क्या है तथा इसको कैसे ज्ञात किया जाता है? तथा ज्ञात करने हेतु कौन कौन से परीक्षण किये जाते हैं? तथा इससे जुड़े हुए अनेक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

दिष्ट धारा मोटर की दक्षता (efficiency of DC motor)

मोटर की दक्षता = (आउटपुट/इनपुट) × 100
= (इनपुट – हानियां)×100/इनपुट
= {1 – (इनपुट – हानियां)/इनपुट} × 100

डी.सी. मोटर की दक्षता (efficiency of DC motor) निम्न परीक्षणों से ज्ञात की जा सकती है –

  1. स्विन बर्न परीक्षण (Swin Burn Test)
  2. ब्रेक परीक्षण (Break Test)
  3. हापकिन्सन परीक्षण (Hopkinson test)

स्विन बर्न परीक्षण (Swin Burn test)

इस परीक्षण में मोटर को शून्य एवं निर्धारित वोल्टेज प्रचालित किया जाता है। यदि Io शून्य भार धारा, Ish क्षेत्र धारा, तथा V सप्लाई वोल्टेज है तब,

स्विन बर्न परीक्षण (Swin Burn test)
Swin burn test

शून्य भार पर मोटर को इनपुट = VI वाट

शन्ट क्षेत्र में इनपुट = VIsh

आर्मेचर ताम्र हानियां = I²aRa

= (I0 – Ish)²Ra

स्थिर हानियां (Wc) = मोटर इनपुट – आर्मेचर ताम्र हानियां

Wc = VI0 – (I0 – Ish)²Ra

आर्मेचर ताम्र हानि की गणना के लिए मोटर को कुछ देर चलाने के पश्चात आर्मेचर प्रतिरोध (Hot Resistance) ज्ञात करते हैं।

दक्षता (Efficiency of DC motor)

जिस भार पर (अर्धभार, पूर्ण भार, अथवा 1/4 भार) मोटर की दक्षता ज्ञात करनी हो, मोटर की विशिष्टियों के विशेषज्ञों के आधार पर वह धारा ज्ञात कर लेते हैं। माना पूर्ण भार धारा I पर दक्षता ज्ञात करनी है तब,

आर्मेचर धारा Ia = I – Ish (in motor)
Ia = I + Ish (in Generator)

मशीन की मोटर की भांति कार्य करने पर दक्षता (Efficiency of Machine working as Motor)
मोटर इनपुट = VI
आर्मेचर ताम्र हानियां = (I – Ish)²Ra
स्थिर हानियां = Wc
(शून्य भार पर की जा चुकी है)
कुल हानियां
मोटर की दक्षता = (इनपुट – हानियां) × 100/इनपुट
η = [VI – {(I – Ish)²Ra + Wc}] × 100/VI

मशीन की जनेरेटर की भांति कार्य करने पर दक्षता (Efficient of machine working as generator)
जनरेटर आउटपुट = VI
आर्मेचर ताम्र हानियां = (I + Ish)²Ra
स्थिर हानियां = Wc
कुल हानियां = (I – Ish)²Ra + Wc
जनेरेटर की दक्षता = आउटपुट × 100 / (आउटपुट + हानियां)
= VI / {(I + Ish)²Ra + Wc}

ब्रेक परीक्षण (Break Test)

इस परीक्षण में मोटर की शाफ्ट पर एक घिरनी (pully) लगाई जाती है। घिरनी पर बैल्ट (belt) तथा स्प्रिंग तुला की व्यवस्था होती है। मोटर को प्रचारित कर उपलब्ध व्यवस्था द्वारा बेल्ट को इतना कसा जाता है कि मोटर उस भार धारा के तुल्य धारा लेती है जिस पर दक्षता ज्ञात करनी है यदि मोटर की गति N, स्प्रिंग तुला के पाठयांकW1, W2 एवं घिरनी की त्रिज्या R हो तब,
घिरनी पर बलघूर्ण Tsh = (W1 ~ W2)R
तथा मोटर की आउटपुट
                                 = 2πN(W1 ~ W2)R mKg
मोटर की दक्षता = 2πNTsh/VI

Break Test
Break test

होपकिंसन परीक्षण (Hopkinson Test)

इस परीक्षण में दो समरूप डी.सी. मशीनों (Identical d.c.machine) को यांत्रिक एवं विद्युतीय रुप से युग्मित किया जाता है तथा क्षेत्र प्रतिरोध द्वारा इस प्रकार समायोजन किया जाता है कि उसमें से किसी भी मोटर को जनरेटर अथवा मोटर की भांति प्रचालित कर सकते हैं।

इस परीक्षण में किसी भी मशीन की निर्गत शक्ति व्यर्थ की बिना पूर्ण भार परीक्षण किया जा सकता है। मोटर, जनेरेटर के प्रचालन हेतु यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है जबकि जनरेटर में विकसित विद्युत शक्ति का उपयोग मोटर की इनपुट के अधिकांश भाग को पूरा करने में होता है।

यदि मशीन को कोई हानि नहीं होती है तब बिना किसी बाह्य शक्ति के उन्हें चलाना चाहिए परन्तु हानियों के कारण जनरेटर का निर्गत मोटर के प्रचालन के लिए पर्याप्त नहीं होता। अत: सप्लाई से ली गई  शक्ति केवल हानियों की पूर्ति ही करती है।
परीक्षण की यह विधि पुनर्जनक विधि (Regenerative test) कहलाती है क्योंकि दोनों मशीनों को निर्गत एक दूसरे को चलाने में प्रयोग होता है।

होपकिंसन परीक्षण (Hopkinson Test)
Hopkinson test

विधि (Method) –

एक मशीन (M) को सप्लाई से सामान्य मोटर की भांति निर्धारित गति पर चलाया जाता है। दूसरी मशीन (G) मोटर से यान्त्रिक रूप से युग्मित है तथा जनरेटर की भाति कार्य करती है। इस मशीन (G) का क्षेत्र उत्तेजन I4 इस प्रकार समायोजित किया जाता है कि इसके द्वारा जनित वोल्टेज सप्लाई वोल्टेज (V) के बराबर होती है। यह वोल्टमीटर से ज्ञात होता है अब दोनों मशीनें विद्युतीय रूप से भी युग्मित हो जाती है। इस स्थिति में मोटर-जेनरेटर प्रणाली सप्लाई पर FLOATING कहलाती है क्योंकि यह न तो सप्लाई से धारा रहे हैं और ना सप्लाई को धारा दे रही है

किसी भी मशीन का क्षेत्र उत्तेजन कम कर उसे मोटर की भांति तथा उत्तेजन बढ़ाकर जनरेटर की भांति प्रचालित कर सकते हैं।
मशीन की दक्षता = √I2/(I1 + I2)
यहां I1 = सप्लाई से ली गई धारा तथा
I2 = जनेरेटर की भांति कार्य कर रही मशीन की धारा

वैकल्पिक विधि –

माना प्रत्येक मशीन का आर्मेचर प्रतिरोध = Ra
सप्लाई वोल्टेज = V
सप्लाई से ली गई धारा = I1
जरनेटर की भांति कार्य करने वाली मशीन की धारा = I2
मोटर की उतेजन धारा = I3
जेनरेटर की उत्तेजक धारा = I4
सप्लाई से ली गई शक्ति = VI1
मोटर में आर्मेचर ताम्र हानिया = (I1 + I2)²Ra
जनरेटर में ताम्र हानियां = I²2Ra
दोनों मशीन की कुल स्ट्रे हानियां
= VI – {(I1 + I2)²Ra – I²2R²a
= W(माना)
प्रत्येक मशीन की स्ट्रे हानियां = W/2

मोटर की दक्षता (Efficiency of motor)

मोटर को इनपुट = V(I1 + I2) + VI3
= Wi (माना)
मोटर में हानियां = आर्मेचर ताम्र हानियां + शण्ट ताम्र हानियां + स्ट्रे हानियां
= (I1 + I2)²Ra + VI3 + W/2
= Wm (माना)
मोटर की दक्षता = (इनपुट – हानियां) × 100 /इनपुट
= (Wi – Wm) × 100 / Wi

जेनरेटर की दक्षता (Efficiency of Generator)

जेनरेटर की आउटपुट = VI2
जेनरेटर में हानियां = I²2Ra + VI4 + W/2
(माना) = Wg
जेनरेटर की दक्षता = आउटपुट × 100/ (आउटपुट + हानियां )
= VI2 × 100 / (VI2 + Wg)

इन्हें भी पढ़ें – दिष्ट धारा मोटर क्या है? what is DC motor in hindi

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