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दिष्ट धारा जनित्रों के अभिलक्षण क्या होते हैं? (What are the characteristics of DC generator in hindi)

नमस्कार दोस्तों इस लेख में हम जानेंगे कि दिष्ट धारा जनित्रों के अभिलक्षण (Characteristics of DC generator) क्या होते हैं? तथा कितने के प्रकार होते हैं? तथा इससे जुड़े हुए अनेक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

प्रत्येक d.c. जेनरेटर के निम्न तीन प्रमुख अभिलक्षण (Characteristics) होते हैं –

चुंबकीय या खुला परिपथ अभिलक्षण – E0/I (Magnetic or open circuit characteristics of DC generator, O. C. C.) –

जनरेटर की स्थिर गति और उसकी क्षेत्र धारा If तथा (आर्मेचर के खुले होने पर) उसने प्रेरित विद्युत वाहक बल E0 के बीच प्राप्त व्रक (Curve) को जनरेटर चुम्बकीय अभिलक्षण कहते हैं। इसे निर्भार संतृप्ति अभिलक्षण (No – load saturation characteristics) के नाम से भी जाना जाता है। यह वक्र दर्शाता है कि फ्लक्स घनत्व अवस्था में किस तरह परिवर्तित होता है जब क्षेत्र उत्तेजन अधिकतम मान से शून्य मान तक परिवर्तित होती है, यह वैद्युत चुंबकों के पदार्थ के चुंबकन वक्र जैसा है। इस अभिलक्षण का रुप सभी प्रकार के जनरेटर्स में लगभग एक समान होता है।

आंतरिक या पूर्ण अभिलक्षण –

यह अभिलक्षण जनित्र की स्थिर गति पर आर्मेचर धारा तथा आर्मेचर का में आर्मेचर में वास्तविक प्रेरित विद्युत वाहक बल E (= E0 में आर्मेचर प्रतिक्रिया के कारण वोल्टतापात ) के बीच संबंध दर्शाता है। जनित्र के आर्मेचर चालकों में जब धारा प्रवाहित होती है तब आर्मेचर में एक विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र (electromagnetic Field) उत्पन्न होता है जो मुख्य क्षेत्र के विपरीत दिशा में कार्य करता है। इस क्षेत्र को विचुंबकन क्षेत्र (demagnetising field) कहते हैं। उसकी उत्पत्ति से जनित्र में प्रेरित विद्युत वाहक बल कम होने लगता है।

(So, E = ΦZNP/(60A))

बाह्य अभिलक्षण – V/L (External characteristics of DC generator) –

जनरेटर की स्थिर गति पर उसकी टर्मिनल वोल्टता V तथा भार (load) धारा IL के बीच खींचा गया वक्र बाह्य या कार्यकारी अभिलक्षण (load characteristics) कहलाता है। यहां V का मान ( E – IaRa) के बराबर होता है, जहां IaRa आर्मेचर के चालको में वोल्टतापात है। इस निष्पादन अभिलक्षण (Performance characteristics) या कभी-कभी वोल्टता नियमन वक्र (voltage regulationc curve) के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसमें आर्मेचर में वोल्टतापात की गणना भी सम्मिलित है क्योंकि V < E होता है, इसलिए बाह्य अभिलक्षण वक्र आन्तरिक अभिलक्षण वक्र से नीचे होता है, यह अभिलक्षण जनित्र की उपयुक्तता, किसी विशेष कार्य के लिए परखने हेतु महत्वपूर्ण होता है।

इसे दो विधियों से प्राप्त किया जा सकता है –

  • भार अवस्था में (loaded) जनरेटर पर उपयुक्त वोटमीटर और अमीटर से एक ही समय में माप (measurements) लेकर
  • O.C.C. से ग्राफीय विधि की सहायता से। शर्त यह है की आर्मेचर तथा क्षेत्र प्रतिरोध ज्ञात हो तथा निर्धारित भार अवस्थाओं के अंतर्गत आर्मेचर प्रतिक्रिया का विचुम्बकन प्रभाव (demagnetising effect) भी ( लघुपथ परीक्षण से) ज्ञात हुआ हो।

दिष्ट धारा श्रेणी जेनरेटर के चुंबकीय, आन्तरिक तथा बाह्य अभिलक्षण (Magnetic, Internal and External characteristics of DC Series Generator)

प्रथम चालक जैसे विद्युत मोटर, पेट्रोल इंजन, डीजल इंजन, स्टीम टरबाइन, गैस टरबाइन, स्टीम इंजन आदि की सहायता से जनरेटर को स्थिर गति पर चलाया जाता है।

तत्पश्चात भार R के मान को अधिकतम से धीरे-धीरे घटाया जाता है । प्रत्येक पद पर प्रेक्षित (observed) धारा एवं वोल्टता के मान को ग्राफ पर अंकित किया जाता है। दिष्ट धारा श्रेणी जनित्र का बाह्य या भार अभिलक्षण (V/I वक्र) चित्र में प्रदर्शित किए गए हैं।

श्रेणी जनरेटर में फ्लक्स का मान, भार या आर्मेचर धारा पर निर्भर करता है। अवशिष्ट चुम्बकत्व (residual magnetism) के कारण, शून्य धारा पर वक्र, वोल्टता अक्ष से शून्य मान से थोड़ा कुछ ऊपर से प्रारंभ होता है। यदि आर्मेचर प्रतिक्रिया का विचुम्बकन प्रभाव इसमें सम्मिलित न हो तो वह वक्र कुल फ्लक्स (total flux) का मान देता है जबकि जनरेटर, बाह्य भार को धारा प्रदान कर रहा होता है किंतु आर्मेचर प्रतिक्रिया के कारण वास्तविक वक्र इस वक्र के कुछ नीचे रहता है जो आंतरिक अभिलक्षण कहलाता है।

जनरेटर की टर्मिनल वोल्टता V, विद्युत वाहक बल E में से मशीन में वोल्टेज ड्राप को घटाने से प्राप्त मान के बराबर होता है। यदि Rs और Ra क्रमश: श्रेणी क्षेत्र और आर्मेचर प्रतिरोध हैं, तब वोल्टेज ड्राप I(Ra + Rse) होगा तथा टर्मिनल वोल्टता,

V = E – I(Ra +Rse)

वोल्टेज ड्राप या ओह्मिक पात (Ohmic drop) ग्राफीय रुप से मूल बिंदु से होकर जाने वाली सीधी रेखा द्वारा प्रदर्शित होता है। वक्र (III) बाह्य अभिलक्षण है। स्पष्ट है कि भार धारा को जैसे-जैसे बढ़ाते हैं टर्मिनल वोल्टता पहले लगभग रेखीय नियम के अनुसार बढ़ती है, फिर वक्रीय रुप से धीरे-धीरे बढ़ती हैं और अंत में घटने लगती है।

भार धारा IL (या आर्मेचर धारा Ia) के बढ़ने पर जेनरेटर में फ्लक्स भी बढ़ता है। यदि आर्मेचर प्रतिक्रिया और आर्मेचर प्रतिरोध नगण्य (negligible) हों तब जनित वोल्टेज तथा टर्मिनल वोल्टेज के मान एक ही होंगे तथा बाह्य अभिलक्षण मशीन के चुम्बकन वक्र के समान होंगे।

भार या वाह्य अभिलक्षण को देखने से स्पष्ट होता है कि दिष्ट धारा श्रेणी जनरेटर आरोही वोल्टता अभिलक्षण ( rising voltage characteristics) वाला जनरेटर है किंतु उच्च भार धारा पर जेनरेटर की टर्मिनल वोल्टता घटने लगती है ऐसा इस कारण से होता है क्योंकि उच्च आर्मेचर धारा पर आर्मेचर प्रतिक्रिया अत्यधिक होती है। वास्तव में भार धारा IL से बढ़ने पर जेनरेटर की टर्मिनल वोल्टता धीरे-धीरे घटती है तथा भार धारा OB पर टर्मिनल वोल्टता कम होकर शून्य हो जाती है।

यदि जेनरेटर, बाह्य अभिलक्षण के प्रारम्भिक सीधी रेखा वाले भाग पर कार्य करे तो यह भार धारा के समानुपात में वोल्टता प्रदान करता है। बूस्टर इस प्रकार का एक श्रेणी जेनरेटर है। यदि बाह्य अभिलक्षण के अवरोही (drooping) भाग PB पर कार्य किया जाये और यदि जेनरेटर को इस प्रकार अभिकल्पित किया जाए कि यह भाग लगभग ऊर्ध्वाधर हो तो जनित्र, बाह्य परिपथ (external Circuit) के प्रतिरोध से स्वतंत्र, लगभग स्थिर धारा प्रदान करेगा। इस प्रकार के श्रेणी जेनरेटर बहुत से श्रेणी में जुड़े आर्क लैम्पों (arc Lamps) को प्रकाशित करने के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं।

बाह्य उत्तेजित जेनरेटर का आन्तरिक एवं बाह्य भार अभिलक्षण (Internal and load characteristics of separately excited Generator) –

सामान्यत: जेनरेटर के अभिलक्षण (Characteristics of DC generator) स्थिर गति पर अंकित (plot) किए जाते हैं। बाह्य उत्तेजित जनरेटर में उत्तेजन, भार धारा (load current) से स्वतन्त्र होता है, इसलिये यदि आर्मेचर प्रतिक्रिया शून्य हो तो फ्लक्स स्थिर होगा जैसे कि चित्र मैं वक्र I द्वारा प्रदर्शित है।

आर्मेचर प्रतिक्रिया के कारण वक्र कुछ थोड़ा झुका (drooping) है (वक्र II)। दूसरे वक्र द्वारा आर्मेचर में प्रेरित विद्युत वाहक बल ज्ञात होता है। अत: यह संपूर्ण या आंतरिक अभिलक्षण है। कुल जनित विद्युत वाहक बल में से आर्मेचर वोल्टतापात को घटाने से (भार की दिशा में) टर्मिनल वोल्टता प्राप्त होती है।

वक्र III बाह्य अभिलक्षण प्रर्दशित करता है वक्र से स्पष्ट है कि भार वृद्धि से के साथ-साथ आर्मेचर प्रतिक्रिया के कारण टर्मिनल वोल्टेज में थोड़ी-थोड़ी कमी आती है। इस कमी को उत्तेजन धारा में वृद्धि करके सरलता से पूरा किया जा सकता है।

शण्ट जेनरेटर के चुम्बकीय अभिलक्षण (Magnetic or O/C Characteristics of shunt Generators) –

चित्र में शंट जेनरेटर के चम्बकीय अभिलक्षण प्रदर्शित किए गए हैं वक्र का प्रारम्भिक भाग रेखिय होता है क्योंकि निम्न फ्लक्स घनत्व पर लौह पथ (Iron path) प्रतिष्टम्भ  (Reluctance) नगण्य होता है तथा कुल प्रतिष्टम्भ वायु अन्तराल (air gap) का होता है

Magnetic or O/C Characteristics of shunt Generators
Magnetic or O/C Characteristics of shunt Generators

जो स्थित होता है। फ्लक्स घनत्व अर्थात् क्षेत्र धारा बढ़ने पर चुम्बकीय ध्रुव सन्तृप्त (Saturate) होने लगते हैं तथा वक्र फ्लैट होने लगता है तथा उत्पन्न विद्युत वाहक बल लगभग स्थिर रहता है।

शण्ट जेनरेटर का बाह्य या भार अभिलक्षण (External or Load characteristics of Shunt Generator)

चित्र में शण्ट जनरेटर के बबह्य अभिलक्षण प्रदर्शित किए गए हैं यदि  जेनरेटर पर धीरे-धीरे भार बढ़ाया जाए तो प्रतिरोध में कमी होने से धारा के मान में वृद्धि होगी। लोड धारा बढ़ने के कारण टर्मिनल वोल्टता मैं और कमी होती है। प्रणामत: धारा और कम हो जाती है।

Load characteristics of DC shunt generator
Load characteristics of DC shunt generator

जब धारा एक निश्चित मान प्राप्त कर लेती है (आधुनिक जनित्रों में सामान्य पूर्ण भार की तुलना में बहुत अधिक ) तब भार प्रतिरोध क्षेत्र कुण्डलन को उस सीमा तक लघुपथित करता है। कि टर्मिनल वोल्टता, भार प्रतिरोध की तुलना में अधिक तेज से घटती है ऐसी स्थिति में बाह्य प्रतिरोध में और अधिक कमी होने पर वास्तव में धारा में कमी होती है। अभिलक्षण वक्र उस समय पीछे की ओर घूमता(droop) है तथा जब आर्मेचर लघुपथित होता है तब यह धारा अक्ष को किसी बिंदु A पर काटती है। यही कारण है कि शण्ट जेनरेटर गंभीर (Severe) लघुपथित के कारण पुन: आवश्यकता होने पर पर्याय: उत्तेजित होने में असफल हो जाता है।

भार की स्थिति में शण्ट जेनरेटर की टर्मिनल वोल्टता में कमी (Drop) के तीन मुख्य कारण है –

आर्मेचर प्रतिरोध – पात (Armature Resistance Drop)

जैसे-जैसे भार धारा बढ़ती है आर्मेचर परिपथ केप्रतिरोध में अधिकाधिक वोल्टता प्रयुक्त (Consume) होती है। अतः टर्मिनल वोल्टेज V = E – IaRa घटती है।

आर्मेचर प्रतिक्रिया (Armature Reaction) –

आर्मेचर प्रतिक्रिया के विचुम्बकन प्रभाव (Demagnetising effect) के कारण ध्रुव फ्लक्स क्षीण (Weak) हो जाता है तथा आर्मेचर में जनित विद्युत वाहक बल घट जाता है।

आर्मेचर प्रतिक्रिया और आर्मेचर प्रतिरोध के कारण टर्मिनल वोल्टता में पतन (Drop) से क्षेत्र धारा घट जाती है जिसके कारण जनित या प्रेरित विद्युत वाहक बल पुनः और भी हम हो जाता है।

शण्ट जेनरेटर के आन्तरिक अभिलक्षण (Internal characteristics of Shunt Generator) –

चित्र में शण्ट जेनरेटर के आंतरिक अभिलक्षण प्रदर्शित के गए हैं यह अभिलक्षण बाह्य अभिलक्षण में आर्मेचर वोल्टतापात जोड़कर प्राप्त किए जाते हैं।

कम्पाउन्ड जेनरेटर के अभिलक्षण (Characteristics of Compound Generator) –

चित्र में कंपाउंड जेनरेटर के अभिलक्षण प्रदर्शित किए गए हैं शण्ट जनरेटर के अभिलक्षण ड्रपिंग (Drooping) प्रकृति के तथा श्रेणी जेनरेटर के अभिलक्षण उठती (Rising) हुई प्रकृति के होतें हैं। दोनों अभिलक्षणों को परस्पर संयोजित कर ऐसा वक्र प्राप्त होता है जो लोड धारा के एक बड़े क्षेत्र (Big Range) में लगभग स्थिर वोल्टेज प्रदर्शित करता है यह अभिलक्षण कंपाउंड जेनरेटर के अभिलक्षणों के समान होते हैं।

लेविल कंपाउंड जनरेटर (Level compound Generator) –

इस प्रकार के जनरेटर में शून्य लोड से पूर्ण लोड धारा तक लगभग स्थिर वोल्टेज प्राप्त होती है।

ओवर कम्पाउन्ड जेनरेटर (Over Compound Generator) –

इस जेनरेटर में लोड धारा बढ़ने पर टर्मिनल वोल्टेज का मान बढ़ता है।

अंडर कंपाउंड जेनरेटर (Under compound Generator) –

इस प्रकार के जेनरेटर के अभिलक्षण अधिक ड्रपिंग प्रकृति के होते हैं तथा लोड धारा में वृद्धि से टर्मिनल वोल्टेज तेजी से कम होती है।

इन्हें भी पढ़ें – दिष्ट धारा जेनरेटर क्या है? (What is DC generator)

डी. सी. जेनरेटर के प्रकार (Type of DC Generator in hindi)

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