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दिष्ट धारा जेनरेटर क्या है? (What is DC generator)

नमस्कार दोस्तों इस लेख में हम जानेंगे कि दिष्ट धारा जनित्र (DC generator) क्या है? इसके क्या क्या भाग होते हैं? तथा यह कितने प्रकार के होते हैं? तथा इससे जुड़े हुए अनेक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

दिष्ट धारा जनित्र (DC generator)

दिष्ट धारा जेनरेटर (DC generator) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। जनरेटर को यांत्रिक ऊर्जा देने के लिए प्रथम चालक (Prime mover) का प्रयोग किया जाता है। प्राइम मूवर हेतु कोई D.C. अथवा A.C. मोटर प्रयुक्त किया जा सकता है। मुख्य प्राइम मूवर इंजिन, पेट्रोल इंजिन, गैस टरबाइन, जल टरबाइन इत्यादि है।

जेनरेटर में एक स्थिर भाग (stator) चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा एक घूर्णीय गति करने वाला भाग आर्मेचर (armature) होता है। स्थिर भाग में चुम्बकीय ध्रुव (magnetic poles) एवं क्षेत्र कुंडली (Field winding) होती है। आर्मेचर कुंडली में चालक श्रेणी समांतर क्रम में संयोजित रहते हैं। आर्मेचर शाफ्ट पर एक कम्यूटेटर प्रयुक्त किया जाता है जिसका संयोजन आर्मेचर चालकों से होता है। कम्यूटेटर पर स्थिर ब्रुश लगे होते हैं जिनके द्वारा आर्मेचर में उत्पन्न धारा बाह्य परिपथ को दी जाती है।

चुंबकीय क्षेत्र (Φ) में आर्मेचर कुंडली के घूमने से आर्मेचर चालक चुंबकीय फ्लक्स को काटते हैं। जिसके फलस्वरुप फैराडे के विद्युत चुंबकीय नियम (e = -NdΦ/dt) के अनुसार आर्मेचर चालकों में विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।

डी. सी. जेनरेटर का सिद्धांत

चित्र में विद्युत वाहक बल होने की क्रिया प्रदर्शित की गई है। जब कुंडली का तल चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के लम्बवत होता है तब कुंडली से ग्रंथित (linked) फ्लक्स (Φ) मान उच्चतम परंतु फ्लक्स ग्रंथियों के परिवर्तन की दर न्यूनतम होती है। कुंडली के 90° घूमने पर ग्रंथियों के परिवर्तन की दर d(NΦ)/dt अधिकतम होती है उत्पन्न विद्युत वाहक बल भी अधिकतम होता है। कुंडली के 180° घूर्णन पर d(NΦ)/dt पुनः न्यूनतम होने के कारण विद्युत वाहक बल भी शून्य हो जाता है।

आर्मेचर में प्रेरित विद्युत वाहक बल

इसी प्रकार 180° से 360° घुर्णन पर क्रिया विपरीत दिशा में होती है। चित्र 6.1(b) में प्रेरित विद्युत वाहक बल का आकार प्रदर्शित किया गया है।

कम्यूटेशन

धारा के एक ही दिशा में प्रवाह होने के लिए कुंडली के सिरे एक स्पलिट (split) रिंग से कनैक्ट किये जाते हैं।
स्पलिट रिंग कम्यूटेटर की भांति कार्य करता है। यह बुशों की सहायता से घूमने वाले चालक के सिरों के संयोजन उलट देता है जिससे विद्युत वाहक बल की दिशा लोड R में सदा एक ही रहती है। कुंडली की संख्या बढ़ाने पर उत्पन्न विद्युत वाहक बल स्थिर प्राप्त होता है।

दिष्ट धारा जेनरेटर (DC generator) में उत्पन्न विद्युत वाहक बल निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है।

E = (ΦZN/60)(P/A)

यहां, Φ = चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्पन्न फ्लक्स
Z = आर्मेचर में चाल कों की संख्या
N = आर्मेचर परिभ्रमण की गति
P = क्षेत्र में ध्रुवों की संख्या
A = कुंडली में समानान्तर परिपथ (parallel Circuit) की संख्या। यह कुंडलन के प्रकार अर्थात लेप अथवा तरंग कुण्डलन पर निर्भर करता है।

दिष्ट धारा जेनरेटर के मुख्य भाग (Part of DC generator)

डी. सी जनरेटर के निम्न भाग होते हैं –

क्षेत्र चुंबक (Main field magnets)

क्षेत्र चुम्बक

क्षेत्र चुंबक का कार्य मुख्य फ्लक्स उत्पन्न करना है। यह विद्युत चुम्बक होते हैं। ध्रुव चुंबक नरम इस्पात (Mild steel) में बनाए जाते हैं। शन्ट जेनरेटर में क्षेत्र कुण्डलन के लिए पतला चालक तार एवं श्रेणी जनरेटर में मोटा चालकता प्रयुक्त किया जाता है।

योक (Yoke)

योक

यह जेनरेटर (DC generator) की मुख्य बॉडी (body) होती है। इस पर (अन्दर की तरफ) मुख्य ध्रुव स्थापित किए जाते हैं। योक के लिए ढलवा लोहे (cast steel) का प्रयोग किया जाता है।

आर्मेचर (Armature)

आर्मेचर सिलिकान स्टील की लगभग 0.1 सेमी मोटी लेमिनेशन (silicone steel laminations) द्वारा बनाया जाता है। लेमिनेशन में आर्मेचर कुंडली के लिए खांचे (slots) बने होते हैं। लेमिनेशन के प्रयोग से आर्मेचर में भंवरधारा हानियां कम हो जाती है।

आर्मेचर

आर्मेचर कुण्डलन (Armature Winding)

आर्मेचर कुंडली दो प्रकार की होती है। लेप कुण्डलन तरंग कुण्डलन आर्मेचर कुण्डली आर्मेचर में बने खांचों में स्थिर करने के लिए वैज का प्रयोग किया जाता है। आर्मेचर कुंडली में तांबे का चालक तार का प्रयोग किया जाता है।

कम्यूटेटर (Commutator)

कम्यूटेटर का मुख्य कार्य आर्मेचर में उत्पन्न विद्युत वाहक बल को एक ही दिशीय (unidirectional) करना है। कम्यूटेटर में वैज के आकार (wedge shaped) की कठोर तांबे में की सेगमेंट का प्रयोग किया जाता है।

कम्यूटेटर

बुश (Brush)

कम्यूटेटर से धारा प्राप्त करने के लिए बुशों का प्रयोग किया जाता है। बुश, कम्यूटेटर पर बुश होल्डर द्वारा स्थिर रहते हैं। बुश सदा कम्यूटेटर सेगमेन्ट को स्पर्श करते हैं। बुशों को कम्यूटेटर अक्ष के सापेक्ष घुमाकर आवश्यकतानुसार व्यवस्थित किया जा सकता है। बुश पर्याय: कार्बन
अथवा ग्रेफाइट से निर्मित किए जाते हैं। बुस बनाने के लिए तांबे का प्रयोग भी किया जा सकता है।

बुश होल्डर

इन्हें भी पढ़ें – दिष्ट धारा मोटर क्या है? what is DC motor in hindi.

डी.सी. श्रेणी मोटर के अभिलक्षण क्या हैं (What are the Characteristics of DC Series Motor in hindi)

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