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डिजिटल वोल्टमीटर क्या है? What is Digital voltmeter in hindi –

नमस्कार दोस्तों, इस लेख में हम जानेंगे कि डिजिटल वोल्टमीटर (Digital voltmeter) क्या होता है? डिजिटल वोल्टमीटर (Digital voltmeter) कितने प्रकार के होते हैं? इनका क्या लाभ होता है? प्रयोग करते समय किन बातों को ध्यान में रखकर प्रयोग करना है? इससे जुड़े तथ्यों के बारे में जानेंगे।

Digital voltmeter
Digital voltmeter

डिजिटल वोल्टमीटर (Digital voltmeter) ए.सी. (alternating current) अथवा डी.सी. (direct stream) वोल्टेज को निश्चित अंकों (discrete number) में डिस्प्ले करता है जबकि ऐनालॉग डिवाइस, वोल्टेज को एक स्केल पर प्वाइन्टर के डिफ्लैक्शन (Deflection) को प्रदर्शित करती है। डिजिटल डिस्प्ले (Digital display), अनेक परिस्थितियों में अधिक उपयोगी होता है।

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डिजिटल वोल्टमीटर के भाग (Part of Digital voltmeter)

इसमें हम यह जानेंगे कि डिजिटल वोल्टमीटर किन – किन से मिलकर बना होता है। तथा इसमें कौन सा भाग धात्विक तथा कौन सा भाग अधात्विक होता है। डिजिटल वोल्टमीटर के भाग निम्नलिखित हैं –

  • डिस्प्ले (Display)
  • लाल प्लग (धनात्मक टर्मिनल) (Red plug)
  • काला प्लग (ऋणात्मक टर्मिनल) (Black plug)
  • साॅकेट ((Socket)
  • रोटरी

डिस्प्ले (Display)

यह डिजिटल वोल्ट मीटर का वह भाग होता है जो वोल्टेज को अंक के रुप में प्रदर्शित करता है। या हम कह सकते है कि डिस्प्ले ही हमें वोल्टेज की सही सूचना देता है।

लाल तथा काला प्लग (Positive and negative plug)

प्लग एक ऐसा भाग है जो किसी इलेक्ट्रोनिक डिवाइस या विद्युत परिपथ को डिजिटल वोल्टमीटर से जोड़ने का कार्य करती है। यदि प्लग न हो तो डिजिटल वोल्ट मीटर की डिस्प्ले पर वोल्टेज प्रदर्शित नहीं होता है।

रोटरी

यह एक ऐसा भाग होता है जो वोल्टमीटर में जिसके द्वारा डिस्प्ले को सूचित करता है कि ए.सी. की जांच कर रहे हैं या डी.सी. की जांच करनी है।

डिजिटल वोल्टमीटर का वर्गीकरण (Classification of Digital voltmeter)

डिजिटल वोल्टमीटर को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है –

  1. रैम्प टाइप डिजिटल वोल्टमीटर (Ramp Type DVM)
  2. इंटीग्रेटिंग टाइप डिजिटल वोल्टमीटर (Integrating type DVM)
  3. कन्टीन्यूअस बैलेंस डिजिटल वोल्टमीटर (Continuous type DVM)
  4. सक्सैसिव एप्रौक्सिमेशन टाइप डिजिटल वोल्टमीटर (Successive Approximation type DVM)

रैम्प टाइप डिजिटल वोल्टमीटर (Ramp Type Digital voltmeter) –

रैम्प टाइप DVM के ऑपरेशन का सिद्धांत उस समय के मापन पर आधारित है जिसमें एक लीनियर रैम्प वोल्टेज शून्य से इनपुट वोल्टेज लेविल तक उठने में लेती है अथवा वह समय जिसमें इनपुट वोल्टेज शून्य तक कम होने में लेती है यह समय अंतराल (time interval) एक इलेक्ट्रॉनिक समय अंतराल काउन्टर द्वारा मापा जाता है तथा काउन्टर, डिजिट्स में किसी इलेक्ट्राॅनिक इन्डिकेटिंग डिवाइस पर डिसप्ले होता है।

इंटीग्रेटिंग टाइप डिजिटल वोल्टमीटर (Integrating type Digital voltmeter) –

इंटीग्रेटिंग टाइप डिजिटल वोल्टमीटर, इनपुट को वोल्टेज की “सत्य औसत मान (Tru average value)” एक निश्चित समय में मापता है जबकि रैम्प टाइप DVM वोल्टेज को मापन चक्र की समाप्ति पर सैम्पल करता है। इन्टीग्रेशन करने के लिए एक Voltage-to-frequency कनवर्टर का उपयोग किया जाता है। कनवर्टर फीडबैक कन्ट्रोल सिस्टम की भांति कार्य करता है जो इनपुट वोल्टेज के मान के समानुपाती पल्स जेनरेशन कि रेट नियंत्रित करता है।

एनालॉग से डिजिटल कनवर्टर (A/D converter) की इस विधि का मुख्य लाभ यह है कि यह input voltage पर noise की अधिक मात्रा सुपरइम्पोज होने पर भी मापन ठीक प्रकार (accurately) करता है क्योंकि इसमें input का integration होता है।

कन्टीन्यूअस बैलेंस डिजिटल वोल्टमीटर (Continuous type Digital voltmeter) –

यह पोटेन्शियोमीटर टाइप DVM होता है यह वोल्टेज कम्पेरीजन की तकनीकी पर कार्य करता है। इस DVM में एक अज्ञात वोल्टेज (unknown voltage) की तुलना एक रैफ्रेन्स वोल्टेज (reference Voltage) से की जाती है जिसका मान एक कैलीब्रैटेड पोटेन्शियोमीटर की सैटिंग द्वारा निर्धारित होता है। बैलेंस की स्थिति प्राप्त करने के लिए पोटेन्शियोमीटर की सैटिंग बदली जाती है। बैलेंस (null) पोजिशन प्राप्त होने पर अज्ञात वोल्टेज का मान पोटेन्शियोमीटर की सैटिंग द्वारा प्रदर्शित होता है।

इस DVM में बैलेंस manually नहीं प्राप्त किया जाता परंतु स्वत: (automatically) प्राप्त होता है। इस प्रकार यह DVM वास्तव में ‘Self balancing potentiometer’ है। पोटेन्शियोमीटरीक DVM में मापी जाने वाली वोल्टेज को डिस्प्ले (display) करने के लिए एक ‘Readout’ होता है।

डिजिटल वोल्टमीटर के लाभ (Advantages of Digital Voltmeter)

  1. इसमें मानवीय (Human observation) तथा interpolation त्रूटियां कम हो जाती हैं।
  2. पैरेलैक्स त्रुटि पूर्णतया समाप्त हो जाती है।
  3. प्रेक्षण गति (reading speed) बढ़ जाती है।
  4. Output, digital फार्म में प्राप्त होती है जिसे रिकार्डिंग एवं पुनः प्रोसेस करने में सुविधा होती है।

डिजिटल वोल्टमीटर का मूल्य (Price of Digital voltmeter)

किसी भी वस्तु का मूल्य उसके कार्य क्षमता, प्रयुक्त धातु या अधातुओं के अनुसार होता है। यदि डिजिटल वोल्ट मीटर की बात करें तो इसका मूल्य 200 रूपए से 20000 रूपए तक होता है। जो जितना मूल्यवान होता है वह उतना ही अधिक टिकाऊ तथा अच्छा होता है।

सावधानियां (Precautions) –

  1. डिजिटल वोल्टमीटर को प्रयोग करते समय उसकी बेटरी अच्छी होनी चाहिए। तथा बेट्री सदैव ही 9V की होनी चाहिए।
  2. लाल व काले प्लग में किसी प्रकार का कट नहीं होने चाहिए तथा धनात्मक टर्मिनल (लाल प्लग) को धनात्मक से तथा ऋणात्मक टर्मिनल (काला प्लग) को ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ें।
  3. रोटरी में एक.सी. वोल्टेज की जांच करते समय ए.सी. पर तथा डी.सी. की जांच करते समय डी.सी. पर चिह्नित करना चाहिए।
  4. डिस्प्ले को सदैव ही साफ रखना चाहिए जिससे साफ-साफ दिखाई दे।

डिजिटल वोल्ट मीटर क्या काम करता है?

डिजिटल वोल्टमीटर वोल्टेज का मापन करता है।

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