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तुल्यकाली मोटरों में दोलन क्या होता है? (what is Hunting in synchronous motors in hindi)

नमस्कार दोस्तों इस लेख में हम जानेंगे कि तुल्यकाली मोटरों में दोलन (Hunting in synchronous motor) क्या होता है? तथा दोलनो की किस प्रकार मुक्त किया जाता है? तथा तुल्यकाली मोटर को प्रारम्भ करने की विभिन्न विधियों क्या-क्या है? तथा इसमें कुण्डलन के क्या लाभ होते हैं? तथा इससे जुड़े हुए अनेक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

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Synchronous motor

तुल्यकाली मोटरों में दोलन (hunting in Synchronous motor)

जब तुल्यकाली मोटर (Synchronous motor) को किसी परिवर्ती लोड को चलाने के लिए प्रयोग किया जाता है, तब लोड परिवर्तन के साथ मोटर की गति में कुछ परिवर्तन होते हैं। जिसके कारण रोटर में कम्पन उत्पन्न होते हैं। इसे तुल्यकाली मोटरों का दोलन (Hunting in synchronous motor) कहते हैं। तुल्यकाली मोटर में दोलन की स्थिति स्पंदमान आवृति के कारण भी हो सकती है।

जब तुल्यकाली मोटर (synchronous motor) पर लोड डाला जाता है तब तुल्यकाली मोटर के रोटर ध्रुव घूर्णक क्षेत्र के ध्रुवों से युग्मित कोण बनते हुए पीछे रह जाते हैं जिससे पर्याप्त स्पर्स रेखीय बल मिले, ताकि लोड को वहन करने योग्य बलघूर्ण उत्पन्न हो सके। अब यदि तुल्यकाली मोटर से अचानक लोड को हटा दिया जाए तब रोटर ध्रुव, घूर्णक क्षेत्र के ध्रुवों के ठीक विपरीत हो जाते हैं, परंतु रोटर के जड़त्व के कारण रोटर ध्रुव कुछ अधिक, आगे तक बढ़ते चले जाते हैं, लेकिन यह रोटर ध्रुव फिर पीछे की ओर खिंच जाते हैं तथा इस प्रकार रोटर ध्रुवों का आगे बढ़ना चलता रहता है तथा इस प्रकार नये लोड के अनुरुप नई स्थिति पर केंद्रित दोलन स्थापित हो जाता है।

तुल्यकाली मोटरों को दोलनों से मुक्त कराना (synchronous motor free from hunting)

दोलन को समाप्त करने के लिए रोटर ध्रुव मुखो पर अवमन्दक युग्म (Damping couple) लगाये जाते हैं। यह अवमंदक भारी तांबे की लघुपथित छड़े होती हैं।

यदि रोटर में दोलन होते हैं तो रोटर तथा घूर्णीय चुंबकीय क्षेत्र (rotating magnetic field) के मध्य सापेक्ष गति के कारण अवमंदको में कुछ धाराएं प्रेरित होती है तथा दोलन की गतिज ऊर्जा, अवमंदकों की ऊष्मा में बदल कर कम हो जाती हैं परंतु अवमन्दक रोटर के दोलनों को पूर्णतः समाप्त नहीं कर सकते हैं क्योंकि इनके परिचालन के लिए रोटर ध्रुव तथा स्टेटर क्षेत्र के ध्रुव में कुछ सापेक्ष वेग होना आवश्यक है। रोटर ध्रुव मुखों पर लगाई गई अवमन्दक कुण्डलियां तुल्यकाली मोटर को प्रारम्भ करने के लिए प्रयोग की जाती है।

तुल्यकाली मोटर को प्रारम्भ करने की विधियां (Method of starting synchronous motor) –

प्रथम चालक विधि (Prime mover method)

इस विधि में किसी छोटी प्रेरण मोटर (Induction motor) या तो तुल्यकाली गति से घूमने वाले डीजल या पेट्रोल इंजन तुल्यकाली मोटर को घुमाया जाता है। तुल्यकाली मोटर को प्रत्यावर्ती धारा सप्लाई (A.C. supply) से जोड़ने से पहले इसे प्रत्यावर्तक की भांति चलाकर बस बार से तुल्याकालित किया जाता है, तब तुल्यकाली मोटर के स्टेटर को त्रिफेजी प्रत्यावर्ती धारा सप्लाई दी जाती है तथा प्रथम चालक को मोटर से हटा लिया जाता है।

स्व: प्रारम्भन या स्वचालित विधि (Self starting method)

आधुनिक तुल्यकाली मोटरों में अवमंदक कुंडलन प्रयुक्त की जाती है तथा उन्हें अवमन्दक (damper) कुण्डलन की सहायता से स्वचालित बनाया जाता है। अवमन्दक या पिंजरा कुण्डलन को रोटर ध्रुव नाल के सिरों पर कुण्डलित किया जाता है। इस कुण्डलित किया जाता है।

इस कुण्डलन के लाभ (Advantage of this winding)

  1. तुल्यकाली मोटर को प्रेरण मोटर की तरह स्व-चालित (self starting) होने के लिए प्रारम्भिक बलघूर्ण प्रदान करती है।
  2. हंटिंग प्रभाव (Hunting effect) को कम करती है।

इन्हें भी पढ़ें – डी.सी. मोटर की गति नियन्त्रण कैसे करें? (How to Speed control of DC Motor in hindi)

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